जिले भर में जोर पकड़ने लगी धान की कटाई
महासमुंद। दीपावली और विधानसभा चुनाव के बाद अपने खून पसीने की कमाई को सहेजने में जिले के किसान इन दिनों जुट गए हैं। धान कटाई अब जोर पकड़ने लगी है। किसान सुबह से शाम तक खेतों में नजर आने लगे हैं। कहीं हार्वेस्टर से कटाई की जा रही है तो कहीं मजदूर इस कार्य में जुटे हैं। धान कटाई के बाद किसान ट्रैक्टर या गाड़ा से फसल को खलिहान तक पहुंचा रहे हैं वहीं अर्ली वेरायटी का धान बिक्री के लिए उपार्जन केन्द्रों में पहुँच रहा है।
बता दें कि जिले के किसानों ने जुलाई में जो धान की फसल लगाई थी वह अब पककर पूरी तरह तैयार हो गई है। जिले में धान की फसल पकते ही किसान इसकी कटाई में जुट गए हैं। सुबह से शाम तक धान की कटाई व व्यवस्थापन में पूरा परिवार जुट है। जिला मुख्यालय के समीपस्थ ग्राम बिरकोनी, बेलसोंडा, परसकोल, सिरपुर, लाफिन कला, कोसरंगी, खट्टी सहित अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में धान कटाई जोर पकड़ने लगी है। धान कटाई के बाद किसान ट्रैक्टर या गाड़ा से फसल को खलिहान तक पहुंचा रहे हैं। किसान इस बार अच्छा उत्पादन होने की उम्मीद लगा रहे हैं। अभी मिंजाई जोर नहीं पकड़ पाई है। धान कटाई प्रारंभ होने के बाद कई बडेÞ किसान हार्वेस्टर से फसल कटवा रहे हंै। इधर, किसान मिंजाई में टैÑक्टर के अलावा पारंपरिक रूप से इस्तेमाल होने वाले बैलगाडी, बेलन सहित अन्य साधनों से धान मिंजाई करने की तैयारी में जुट गए हैं।
धान कटाई की मजदूरी बढ़ी
इस वर्ष धान कटाई की मजदूरी भी बढ़ गई है। पहले जहां दिनभर की मजदूरी 180 से 200 रुपए थी वह अब बढ़कर 200 से 280 रुपए तक हो गई है। हार्वेस्टर व थ्रेसर जहां अंदर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं वहां हाथ से ही कटाई की जा रही है। किसानों ने बताया कि पौधों के अधिक सूखने से कटाई में दिक्कतें आती है। क्षेत्र में मजदूर बमुश्किल मिल रहे हैं। क्षेत्र के किसानों ने बताया कि 200 से 250 रूपए मजदूरी देने के बाद भी समय पर मजदूर नहीं मिल रहे हैं। किसान बताते हैं कि मजदूर शुरूआत में अपनी फसलों की कटाई कर लेते हैं, बाद दूसरे के खेतों में मजदूरी करने जाते हैं। आगामी दिनों मजदूरी में और इजाफा होने की संभावना है।
हार्वेस्टर से कटाई-मिंजाई एक साथ
दूसरे प्रांत से पहुंचने लगे हार्वेस्टर-धान कटाई व मिंजाई एक साथ करने के लिए कंबाइन हार्वेस्टर पंजाब, हरियाणा से पहुंच रहे हैं। जो प्रति एकड़ 2800-3 हजार रुपए तक लेते हैं। हार्वेस्टर से धान की कटाई व मिंजाई के बाद किसान धान को सीधे खेत से खलिहान ले जाने के बजाय खरीदी केन्द्रों में ले जाते हैं। हालांकि हार्वेस्टर से धान कटाई कराने पर पैरा खेत में ही रह जाता है। इससे मवेशियों को खिलाने पैरा नहीं मिल पाता, लेकिन इससे समय व पैसों की बचत होती है। इसके अलावा इन दिनों थ्रेसर का भी उपयोग कटाई में बढ़ गया है। थ्रेसर के लिए किसानों को 800 से एक हजार तक चुकाना पड़ रहा है।
अब तक पौने ग्यारह लाख क्विंटल धान की खरीदी
खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में जिले के धान खरीदी केन्द्रों पर शासन द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य पर धान खरीदी प्रगति पर है। जिले के 182 उपार्जन केंद्रों में धान उपार्जन हेतु जिले के पंजीकृत एक लाख 58 हजार 739 किसानों की भूमि का रकबा 2 लाख 28 हजार 614.5506 हेक्टेयर है। कोमाखान में 18 हजार 255, पिथौरा में 32 हजार 863, बसना में 27 हजार 961, बागबाहरा में 15 हजार 666, महासमुंद में 36 हजार 901 एवं सरायपाली तहसील में 27 हजार 93 किसान पंजीकृत हैं।
नोडल अधिकारी जी.एन. साहू ने बताया कि बुधवार तक जिले में 26 हजार 594 किसानों से 11 लाख 75 हजार 521 क्ंिवटल धान (256 करोड़ 82 लाख) का उपार्जन किया जा चुका है।



