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दलों ने जताया भरोसा..क्या जनता ने भी दिया है आशीर्वाद?

सस्पेंस बरकरार,  तीन दिसंबर को घोषित होगा चुनाव परिणाम

महासमुंद। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले नवनिर्मित संसद भवन में ‘महिला आरक्षण बिल’ पास हो गया। हालांकि यह बिल अभी लागू तो नहीं हुआ है पर इसका असर इस विधानसभा चुनाव में देखने को मिला। जिले की चार विधानसभा सीट के लिए भाजपा और कांग्रेस ने यहाँ से चार महिलाओं को टिकट देकर नारी शक्ति पर भरोसा जताया है। अब देखना होगा कि क्या जनता ने भी इन महिला प्रत्याशियों पर भरोसा जताया है? यह तीन दिसंबर को मतगणना के दिन पता चलेगा।
बता दें कि पुरुष के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने वाली महिलाओं के लिए हमेशा से आरक्षण की बात होती रही है। पिछले कुछ वर्षों में हर जगह महिलाओं को पुरुषों की तरह मौका भी मिला है। लेकिन आरक्षण के हिसाब से यह आंकड़ा बहुत कम है। गत दिनों राज्य सभा और लोकसभा में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण बिल पेश हुआ और वह सर्वसम्मति से पारित भी हो गया। हालांकि इस चुनाव में यह लागू नहीं हुआ है,पर इसका असर इस विधानसभा चुनाव में देखने को मिला। इस बार छत्तीसगढ़ के 90 विधानसभा में कांग्रेस ने 18 तो भाजपा ने 15 महिला प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा है। इन 33 में महासमुंद की तीन विधानसभा सीट की महिला प्रत्याशी भी शामिल हैं। इसमें कांग्रेस ने महासमुंद और सरायपाली विधानसभा सीट से क्रमश: डा रश्मि चंद्राकर और श्रीमती चातुरी नंद को चुनाव मैदान में उतारा वहीं भाजपा ने खल्लारी और सरायपाली विधानसभा सीट से क्रमश : श्रीमती अलका चंद्राकर और श्रीमती सरला कोसरिया को चुनावी दंगल में उतारा था। इससे पहले पिछले विधानसभा चुनाव में 90 विधानसभा सीट से भाजपा ने 14 महिलाओं को मौका दिया था जिसमें एक को जीत मिली थी वहीं कांग्रेस की 13 महिला प्रत्याशियों में 10 ने जीत हासिल की थी। इस बार दोनों ही मुख्य पार्टियों ने अपने-अपने घोषणा पत्र में महिलाओं को लुभाने के लिए कई दांव चला है जिसमें विवाहित महिलाओं को हर माह एक निश्चित राशि देने के अलावा घरेलू गैस सिलेंडर पर छूट मुख्य है। अब आगामी तीन दिसंबर को घोषित होने वाले चुनाव परिणाम में पता चलेगा कि जनता ने पार्टियों की महिला प्रत्याशियों पर भरोसा जताया है या उनकी घोषणाओं पर?
महासमुंद से पहली बार महिला को मौका
महासमुंद विधानसभा में राष्ट्रीय दलों ने इससे पूर्व के चुनावों में महिलाओं पर भरोसा नहीं जताया था। काग्रेस हो या बीजेपी या फिर अन्य राष्ट्रीय दल किसी ने भी महासमुंद विधानसभा सीट पर महिला उम्मीदवार नहीं उतारा था। ऐसा नहीं की राष्ट्रीय दलों में महिला दावेदारों की कमी रही। महिला नेत्रियां दोनों दलों से हर बार टिकट के लिए दावेदारी करती रही हैं।  बावजूद राष्ट्रीय दलों के शीर्ष नेतृत्व ने उनकी उपेक्षा की है जबकि विधानसभा में महिला मतदाता पुरुष मतदाताओं से कहीं अधिक है। अविभाजित मध्यप्रदेश से छग राज्य बनने तक दोनों दलों से महासमुंद विधानसभा सीट से महिलाओं को चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिला था। लेकिन इस बार महासमुंद से कांग्रेस ने अपनी परंपरा बदलते हुए यहाँ से पहली बार कांग्रेस जिला अध्यक्ष डॉ रश्मि चंद्राकर पर भरोसा जताया है। वहीं कांग्रेस ने सरायपाली विधानसभा से चातुरी नंद को टिकट दिया।
भाजपा अन्य विधानसभा से देती रहीं महिलाओं को मौका
भाजपा ने 2013 के चुनाव में बसना विधानसभा से रूपकुमारी चौधरी और 2018 के चुनाव में खल्लारी विधानसभा से मोनिका साहू को प्रत्याशी बनाया था। इससे पहले 2013 में सरायपाली सीट से भाजपा ने नीरा चौहान को उम्मीदवार बनाया था। वहीं इस बार के चुनाव में सरायपाली से पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सरला कोसरिया और खल्लारी से अलका चंद्राकर को चुनाव मैदान में उतारा है।

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