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एक ही पार्टी के प्रत्याशियों को चुनती है जिले की जनता

2003 से अब तक हर चुनाव में कभी भाजपा तो कभी कांग्रेस को मौका मिला

महासमुंद। पृथक छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद से हुए चुनावों में वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में महासमुंद विधानसभा को छोड़ जिले की जनता ने एक ही पार्टी केचारों प्रत्याशियों को जीताकर विधानसभा भेजा है। जनता एक ही पार्टी के प्रत्याशियों को लगातार मौका नहीं देती। यह सिलसिला 2003 के विधानसभा चुनाव से लगातार जारी है। क्या जिले में चली आ रही यह परपंरा जारी रहेगी या टूटेगी? यह 3 दिसंबर को मतगणना के बाद ही पता चलेगा। बहरहाल, आसन्न विधानसभा में एक दूसरे को शह और मात देने के लिए प्रत्याशी कमर कस कर चुनाव मैदान में डट गए हैं।
बता दें कि इस समय चुनावी रण में उतरने जा रहे विभिन्न पार्टियों के प्रत्याशी व निर्दलीय प्रत्याशी नामांकन फार्म जमा करने के साथ ही चुनाव प्रचार और चुनावी रणनीतियों में व्यस्त हंै। अभी तक तो लग रहा था कि चारों विधानसभा में मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही होने वाला है, पर टिकट न मिलने से नाराज महासमुंद से कांग्रेस की नपाध्यक्ष श्रीमती राशि त्रिभुवन महिलांग और सरायपाली से टिकट कटने के बाद कांग्रेस के वर्तमान विधायक किस्मत लाल नंद के जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ में जाने के बाद सरायपाली और महासमुंद में त्रिकोणीय मुकाबला होने के आसार नजर आ रहे हंै, हालांकि नाम वापसी के बाद ही स्पष्ट होगा कि कौन-कौन चुनावी मैदान में हैं। बहरहाल, हम बात कर रहे थे जिले के मतदाताओं के मूड की। वर्ष 2003 से पिछले विधानसभा चुनाव तक जनता ने चारों विधानसभा में एक पार्टी के प्रत्याशी को विजयी बनाया है और वह भी एक बार कांग्रेस तो अगली बार भाजपा को। वर्ष 2003 में महासमुंद, खल्लारी, बसना और सरायपाली सीट से भाजपा के प्रत्याशी निर्वाचित हुए थे। इस चुनाव में बीजेपी के महासमुंद से पूनम चंद्राकर कांग्रेस के अग्नि चंद्राकर से महज 1611 वोट से जीते थे। इसी प्रकार खल्लारी से बीजेपी प्रत्याशी प्रीतम दीवान कांग्रेस के भेखराम साहू से 5625 मतों के अंतर से विजयी हुए थे। बसना से भाजपा के डॉ त्रिविक्रम भोई ने कांग्रेस के महेंद्र बहादुर सिंह को 2403 मतों से मात दी थी। वहीं सरायपाली से बीजेपी के त्रिलोचन पटेल ने देवेन्द्र बहादुर को 8732 मतों से हराया था। लेकिन वर्ष 2008 के चुनाव में भाजपा के चारों प्रत्याशी चुनाव हार गए और कांग्रेस के चारों प्रत्याशी विजयी हुए थे। इस चुनाव में महासमुंद विधानसभा से कांग्रेस के अग्नि चंद्राकर ने पिछली हार का बदला लेते हुए भाजपा के मोती साहू को 5044 मतों से पराजित किया। खल्लारी में कांग्रेस के परेश बागबाहरा ने भाजपा के प्रीतम सिंह दीवान को 22505 मतों के बड़े अंतर से हराया। इस साल देवेन्द्र बहादुर सिंह को कांग्रेस ने बसना से टिकट दी उन्होंने भाजपा के प्रेमशंकर पटेल को 15907 मतों के अंतर से हराया था। वहीं सरायपाली से भी कांग्रेस जीत कर आई यहाँ कांग्रेस के डा हरिदास भारद्वाज ने बीजेपी के प्रत्याशी नीरा चौहान को 16222 मतों के अंतर से मात दी थी। 2013 के चुनाव में बीजेपी से टिकट न मिलने से डॉ विमल चोपड़ा निर्दलीय चुनाव लड़े और उन्होंने कांग्रेस के अग्नि चंद्राकर को 4722 मतों से परास्त किया। खल्लारी से बीजेपी के चुन्नीलाल साहू ने कांग्रेस के परेश बागबाहरा को 5999 मतों से हराया था। 2008 के चुनाव में भारी मतों से जीते कांग्रेस प्रत्याशी देवेन्द्र बहादुर सिंह अपनी जीत बरकरार नहीं रख पाए और भाजपा की रूपकुमार चौधरी से 6239 मतों के अंतर से हार गए। इधर, बीजेपी के प्रत्याशी रामलाल चौहान वर्ष 2008 में जीत हासिल कर विधानसभा पहुंचे कांग्रेस के हरिदास भारद्वाज को 28832 के भारी मतों से हराया।
बड़े अंतर से जीते थे कांग्रेस प्रत्याशी
 वर्ष 2018 के चुनाव में केवल बसना विधानसभा को छोड़ महासमुंद, खल्लारी और सरायपाली में कांग्रेस प्रत्याशियों ने बड़े अंतर से जीत हासिल की थी। इस चुनाव में मतदाताओं ने एक बार फिर कांग्रेस के प्रत्याशियों को जिले की चारों विधानसभा से विजयी बनाया था। महासमुंद से कांग्रेस के विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने भाजपा के पूनम चंद्राकर को 22517 मतों के अंतर से, खल्लारी से कांग्रेस के द्वारिकाधीश यादव ने भाजपा की मोनिका साहू को 56978 मतों से हराया था। वहीं बसना से देवेन्द्र बहादुरसिंह ने भाजपा के बागी निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे संपत अग्रवाल को 17508 मतों से हराया था। सरायपाली से कांग्रेस के किस्मतलाल नंद ने भाजपा के श्याम तांडी को 52288 के भारी मतों से पराजित किया था।

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