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Ambedkar Hospital News:मेकाहारा में एक बेड पर दो प्रसूताएं, हाईकोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी 

Ambedkar Hospital News:  हाईकाेर्ट ने कहा “यह व्यवस्था बेहद खराब है, इससे महिलाओं की गरिमा, स्वच्छता और गोपनीयता पर गहरा आघात

Ambedkar Hospital News रायपुर, छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल अंबेडकर अस्पताल (मेकाहारा) में एक बेड पर दो प्रसूताओं को रखने के मामले ने पूरे राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है। हाईकोर्ट ने इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि “यह व्यवस्था बेहद खराब है, इससे महिलाओं की गरिमा, स्वच्छता और गोपनीयता पर गहरा आघात होता है। अदालत ने स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव से शपथपत्र के साथ विस्तृत जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर को होगी, जिसमें स्वास्थ्य विभाग को कोर्ट में शपथपत्र सहित विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी। अस्पताल में पहले भी सर्जरी में देरी, दवाओं की कमी और मरीजों के परिजनों को खुले में रुकने जैसी समस्याएं सामने आ चुकी हैं। अब एक ही बेड पर दो महिलाओं के भर्ती होने की घटना ने सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

एक ही बिस्तर पर दो सिजेरियन डिलीवरी मरीज
एक ही बिस्तर पर दो सिजेरियन डिलीवरी मरीज

Ambedkar Hospital News:  हर दिन 24 प्रसव

दरअसल, 29 अक्टूबर को मेकाहारा के 150 बिस्तरों वाले गायनी वार्ड में सभी बेड फुल हो गए थे। इस वजह से वार्ड नंबर 5 और 6 में दो-दो प्रसूताओं को एक ही बेड पर रखा गया। तस्वीरों में दिखा कि प्रसूताएं अपने नवजात बच्चों के साथ एक ही बेड के हिस्से को सिरहाना बनाकर किसी तरह रात गुजार रही थीं। बताया गया कि अस्पताल में हर घंटे में एक डिलीवरी यानी रोजाना करीब 24 प्रसव होती है । इससे बेड की भारी कमी हो गई है।

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Ambedkar Hospital News: मातृ-शिशु अस्पताल बनाया जाएगा

अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने सफाई दी कि अंबेडकर अस्पताल में पूरे प्रदेश से मरीज रेफर होते हैं, इसलिए मना करना संभव नहीं। उन्होंने कहा कि बेड की समस्या को दूर करने के लिए जल्द ही मातृ-शिशु अस्पताल बनाया जाएगा, जिससे भविष्य में ऐसी स्थिति न बने।

Ambedkar Hospital News: सरकारी अस्पतालों में ऐसी व्यवस्था अस्वीकार्य

इस मामले पर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा ने संज्ञान में लिया। इसे जनहित याचिका मानते हुए अदालत ने तुरंत लिस्टिंग के निर्देश दिए। 30 अक्टूबर को डिवीजन बेंच (मुख्य न्यायाधीश सिन्हा और जस्टिस बी.डी. गुरु) ने इस पर सुनवाई की। अदालत ने कहा कि “सरकारी अस्पतालों में ऐसी व्यवस्था अस्वीकार्य है। महिलाओं की गरिमा की रक्षा करना राज्य की जिम्मेदारी है।

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