लागत बढ़ने और दूध का उचित मूल्य नहीं मिलने से पशुपालकों में आक्रोश, बड़े आंदोलन की तैयारी
जांजगीर-चांपा। पशु आहार और सूखे चारे की लगातार बढ़ती कीमतों तथा दूध का उचित क्रय मूल्य नहीं मिलने से परेशान दुग्ध उत्पादक किसानों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। इसी मुद्दे को लेकर 17 अक्टूबर को बलौदा के घासीदास चौक स्थित भवन में दुग्ध उत्पादक किसानों और पशुपालकों की विशाल बैठक आयोजित की गई। बैठक में क्षेत्र के सैकड़ों किसानों ने शामिल होकर अपनी समस्याएं रखीं और डेयरियों तथा दुग्ध महासंघ की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। किसानों ने दूध के खरीद मूल्य में बढ़ोतरी और पशु आहार की कीमतों पर नियंत्रण की मांग करते हुए बड़े आंदोलन का बिगुल फूंकने का ऐलान किया।लागत बढ़ी, लेकिन दूध का उचित मूल्य नहींबैठक में किसानों ने कहा कि कपास खली, सरसों खली, चोकर, दाना और सूखे चारे (पैरा-भूसा) की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। कई पशु आहार और चारे की कीमतें दोगुनी से भी अधिक बढ़ने का दावा करते हुए किसानों ने कहा कि पशुओं के पालन-पोषण से लेकर दूध उत्पादन तक का खर्च लगातार बढ़ रहा है। इसके बावजूद दुग्ध महासंघ और निजी डेयरियों द्वारा दूध का उचित मूल्य नहीं दिया जा रहा है।किसानों के अनुसार, एक ओर पशुओं के आहार, देखभाल और रखरखाव पर अधिक खर्च करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर दूध की कम कीमत मिलने से उनकी आमदनी प्रभावित हो रही है। ऐसी स्थिति में दुग्ध व्यवसाय घाटे का सौदा बनता जा रहा है। आर्थिक दबाव के चलते पशुपालकों के सामने परिवार का खर्च चलाने और कर्ज चुकाने तक की चुनौती खड़ी हो रही है।मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन तेज करने की तैयारीबैठक में किसानों ने दूध का क्रय मूल्य बढ़ाने और पशु आहार एवं सूखे चारे की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। किसानों का कहना है कि दुग्ध उत्पादन ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में उत्पादन लागत और दूध के खरीद मूल्य के बीच संतुलन जरूरी है, ताकि पशुपालकों को उनके परिश्रम का उचित लाभ मिल सके।किसानों ने संकेत दिया कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा। बैठक में मौजूद दुग्ध उत्पादकों ने एकजुट होकर अपने हक की लड़ाई लड़ने का संकल्प जताया।



