मां दुर्गा को विदाई देने उमड़ा जनसैलाब, बैंड-बाजे की धुन पर थिरके युवा
जांजगीर-चांपा। आदिशक्ति मां भवानी की आराधना, भक्ति और उल्लास से सराबोर शारदीय नवरात्रि पर्व शहर सहित पूरे जिले में धूमधाम से मनाया गया। नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा-अर्चना और आराधना में लीन रहे श्रद्धालुओं ने नम आंखों और जयकारों के बीच माता रानी को विदाई दी। दुर्गा पंडालों में स्थापित प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला शुरू होते ही शहर की सड़कों पर श्रद्धा और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला। बैंड-बाजे और डीजे की धुन पर थिरकते युवा, माता के जयकारे लगाते श्रद्धालु और विसर्जन यात्रा में शामिल महिलाओं एवं बच्चों की भीड़ ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। जांजगीर के भीमा तालाब, बोंगा तालाब सहित विभिन्न नदी-तालाबों में दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। नवरात्रि के अंतिम दिनों में दुर्गा पंडालों में विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। महाअष्टमी पर हवन-पूजन के साथ मां दुर्गा की आराधना की गई, वहीं नवमी तिथि पर कन्या भोज आयोजित कर कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनकी पूजा की गई। इसके बाद विभिन्न दुर्गा उत्सव समितियों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रतिमा विसर्जन की तैयारियां शुरू कीं। मंगलवार 20 अक्टूबर से विसर्जन यात्राओं का सिलसिला शुरू हुआ, जो देर रात तक चलता रहा। कई समितियों ने अपनी परंपरा और सुविधानुसार बुधवार को भी प्रतिमाओं का विसर्जन किया। प्रतिमा विसर्जन के दौरान शहर और आसपास के क्षेत्रों में उत्सवी माहौल बना रहा। आकर्षक ढंग से सजाई गई विसर्जन यात्राओं में दुर्गा उत्सव समितियों के सदस्य उत्साहपूर्वक शामिल हुए। ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजे और डीजे की धुन पर युवाओं ने नृत्य किया। जगह-जगह मां दुर्गा के जयकारे गूंजते रहे। श्रद्धालु पूरे भक्तिभाव के साथ माता रानी को विदाई देने पहुंचे। विसर्जन कार्यक्रम में महिलाओं और बच्चों की भी अच्छी भागीदारी रही। कई स्थानों पर परिवार सहित पहुंचे श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना के बाद प्रतिमाओं के विसर्जन में हिस्सा लिया। शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों तक जिले के विभिन्न शहरों और गांवों में दुर्गा पंडालों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। मां दुर्गा के दर्शन, पूजा-पाठ और धार्मिक आयोजनों के बीच वातावरण भक्तिमय रहा। अष्टमी और नवमी के विशेष अनुष्ठानों के बाद जब प्रतिमाओं की विदाई का समय आया तो श्रद्धालुओं में उत्साह के साथ भावुकता भी दिखाई दी। भक्तों ने मां दुर्गा से सुख-समृद्धि, खुशहाली और परिवार की मंगलकामना करते हुए अगले वर्ष फिर आगमन की प्रार्थना की। विसर्जन के दौरान ‘जय माता दी’ के जयकारों से माहौल गूंजता रहा। प्रतिमा विसर्जन के दौरान संभावित भीड़ और आवागमन को देखते हुए प्रशासनिक व्यवस्थाएं चुस्त-दुरुस्त रखी गईं। विसर्जन स्थलों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही और भीड़ को व्यवस्थित बनाए रखने पर ध्यान दिया गया। विभिन्न दुर्गा उत्सव समितियों के सदस्यों ने भी विसर्जन कार्यक्रम को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में भागीदारी निभाई। भीमा तालाब, बोंगा तालाब सहित अन्य नदी-तालाबों में प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ ही शारदीय नवरात्रि का उत्सव संपन्न हुआ। नौ दिनों तक चली मां भवानी की आराधना के बाद श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष फिर मां के आगमन की कामना के साथ विदाई दी।



