रायपुर। प्रख्यात साहित्यकार गिरीश पंकज के ग़ज़ल संग्रह ‘इक दिन मंज़र बदलेगा का छत्तीसगढ़ी भाषा में भावानुवाद ‘एक दिन हमरो आही का वृंदावन सभागार में विमोचन हुआ। इस ग़ज़ल का भावानुवाद विवेककुमार रहाटगांवकर ने किया है। इस अवसर पर विवेक कुमार की एक और पुस्तक विरासत का भी विमोचन हुआ, जिसमें उनके पिता वसंत रहाटगांवकर और उनके बेटे विभास के साथ उनकी कविताओं का संग्रह है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता की प्रख्यात भाषाविद डॉक्टर चितरंजन कर ने की। विशेष अतिथि के रूप में गिरीश पंकज और बंधु राजेश्वर खरे के साथ डॉ माणिक विश्वकर्मा नवरंग,शशांक खरे, जयंत थोरात कुंजबिहारी शर्मा, सुखनवर हुसैन आदि उपस्थित थे। विवेक कुमार ने बताया कि एक कार्यक्रम में मुझे गिरीश पंकज का ग़ज़ल संग्रह मिला था। उनकी रचनाओं से प्रभावित हुआ तो मुझे लगा उनकी भावनाएं छत्तीसगढ़ी पाठको तक भी पहुंचनी चाहिए इसलिए इनका भावानुवाद किया। डॉक्टर चित्त रंजन कर ने अनुवाद के महत्व पर विस्तार प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी भी रचना का शब्दानुवाद नहीं भावानुवाद होना चाहिए।

मगर अनुवाद ऐसा हो कि वह अनुवाद नहीं, मौलिक सृजन लगे। डॉक्टर नवरंग ने गज़ल के उदगम का संक्षिप्त मगर रोचक इतिहास बताया। कार्यक्रम का संचालन प्रख्यात गजल गायिका साधना रहाटगांव कर ने किया।उन्होंने गिरीश पंकज की एक गज़ल एवं विवेक कुमार द्वारा किए गए छत्तीसगढ़ी अनुवाद का सुमधुर गायन भी किया।

आभार ज्ञापन सारंग ने किया। इस मौके पर रहाटगांवकर परिवार के अनेक सदस्यों के साथ अनेक साहित्य रसिक भी विद्यमान थे। कार्यक्रम के उपरांत के लेखक गिरीश पंकज के सम्मान में केक भी काटा गया।




