रायपुर, संवाद साधना। राजधानी के कोटा स्थित सुयश हॉस्पिटल में इलाज के दौरान इंजेक्शन लगने के बाद एक मरीज की मौत के मामले में 13 साल बाद उपभोक्ता आयोग ने फैसला सुनाया है। आयोग ने अस्पताल को दोषी मानते हुए 15 लाख रुपए का मुआवजा, 1 लाख रुपए मानसिक क्षतिपूर्ति और 10 हजार रुपए वाद व्यय अदा करने का आदेश दिया है। राज्य उपभोक्ता आयोग (न्यायमूर्ति गौतम चौरडिया और प्रमोद कुमार वर्मा की पीठ) ने भी अस्पताल की अपील खारिज करते हुए जिला आयोग का आदेश बरकरार रखा। हिना सोनी ने फैसले के बाद कहा कि उन्हें अब न्याय मिला है।
घटना 26 दिसंबर 2010 की है। मरीज हिमांशु सोनी जो साल 2008 में सडक़ हादसे के बाद से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे, को 18-24 दिसंबर तक सुयश हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। लेजर सर्जरी के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया, लेकिन दो दिन बाद दर्द बढऩे पर जब वे फिर अस्पताल पहुंचे, तो इंजेक्शन लगने के बाद हालत बिगड़ी और उनकी मौत हो गई।
परिजनों का आरोप इंजेक्शन लगाने से हुई मौत
परिजनों ने आरोप लगाया कि इंजेक्शन के बाद ही हिमांशु की तबीयत बिगड़ी। अस्पताल प्रबंधन ने दलील दी कि मरीज को मृत अवस्था में लाया गया था और कोई इंजेक्शन नहीं दिया गया, लेकिन आयोग में प्रतिपरीक्षण के दौरान डॉक्टरों ने स्वीकार किया कि इंजेक्शन देकर पुनर्जीवन का प्रयास किया गया था।
अस्पताल प्रबंधन दस्तावेज पेश करने में असफल
अस्पताल सीसीटीवी फुटेज, विजिटर रजिस्टर और जरूरी चिकित्सकीय दस्तावेज पेश करने में भी असफल रहा। मृतक के पिता को रिपोर्ट तक नहीं दी गई, जिससे विशेषज्ञ राय नहीं ली जा सकी। इन तथ्यों के आधार पर आयोग ने अस्पताल की लापरवाही को स्पष्ट रूप से साबित मानते हुए मृतक की पत्नी हिना सोनी के पक्ष में निर्णय सुनाया।



