Saturday, February 7, 2026

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122 साल बाद अद्भुत संयोग..पितृपक्ष के पहले दिन चंद्रग्रहण , विसर्जन के दिन 21 को सूर्यग्रहण

पितृपक्ष के पहले दिन चंद्रग्रहण , विसर्जन के दिन 21 को सूर्यग्रहण

महासमुंद। कल 7 सितंबर से प्रारंभ होने वाले पितृपक्ष की शुरूआत इस बार चंद्रग्रहण के साथ होगी। 7 सितंबर को पितृ पक्ष की पूर्णिमा का श्राद्ध किया जाएगा। इस दिन चंद्रग्रहण भी है। चंद्रग्रहण भारत में भी दिखाई देगा, जिससे सूतक काल मान्य होगा। चंद्र ग्रहण का आरंभ रात 9.58 बजे और समापन 1.26 बजे होगा। चंद्रग्रहण में ग्रहण से पूर्व नौ घंटे पहले सूतक लग जाता है। इसलिए इस बार चंद्रग्रहण का सूतक 7 सितंबर को 12:57 बजे प्रारंभ हो जाएगा। पूर्णिमा के दिन दोपहर 12:57 बजे से पहले  श्राद्ध, तर्पण किया जा सकेगा।
                 बता दें कि पितृपक्ष को पूर्वजों की स्मृति और उनकी आत्मा की शांति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। हर साल यह समय तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान के लिए समर्पित होता है। लेकिन इस वर्ष का पितृ पक्ष बेहद विशेष माना जा रहा है, क्योंकि इस बार यह एक दुर्लभ खगोलीय संयोग के साथ जुड़ा है। इस वर्ष पितृपक्ष की शुरूआत और अंत दोनों ही ग्रहण के साये में होगी। 7 सितंबर को चंद्रग्रहण से पितृपक्ष आरंभ होगा जबकि पितृ विसर्जन के दिन 21 सितंबर को सूर्य ग्रहण लगेगा। बागबाहरा के पंडित हरीश दुबे ने बताया कि ग्रहण के साथ पितृपक्ष पर विशेष योग भी बन रहे हैं। इसका मंगलकारी प्रभाव पड़ेगा। इस बार ग्रहण का योग बन रहा है। 7 सितंबर को चंद्रग्रहण और 21 सितंबर को सूर्यग्रहण लगेगा। ऐसा अद्भुत संयोग लगभग 122 वर्षों बाद देखने को मिल रहा है। इस ग्रहण से पितृपक्ष पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, बल्कि शुभ होगा। इसका सार्थक परिणाम देखने को मिलेंगे, क्योंकि सूर्यग्रहण का असर नहीं होगा। पितृ पक्ष के पहले दिन यानी आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर दुर्लभ शिववास योग समेत कई मंगलकारी योग बन रहे हैं। इन योग में पितरों का तर्पण और पिंडदान करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलेगी साथ ही व्यक्ति पर पितरों की कृपा पितृ पक्ष की शुरूआत और समापन, दोनों ही समय बरसेगी।
*वर्ष 1903 में दो- दो ग्रहण का बना था संयोग*
वर्ष 1903 में पितृपक्ष में दो ग्रहण का संयोग बना था। तब चंद्र ग्रहण भारत में दृश्य नहीं था ,सूर्यग्रहण का प्रभाव देखने को मिला था। अबकी बार सूर्यग्रहण का प्रभाव नहीं रहेगा। इस खगोलीय संयोग का प्रभाव लोगों के जीवन पर किसी न किसी रूप में जरूर पड़ेगा। अलग-अलग राशियों के लिए इसका असर अलग होगा, कहीं यह परिवर्तन लाएगा, ऐसे में यह समय आध्यात्म, संयम और पूर्वजों की कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष रूप से उपयुक्त रहेगा।
*पितृ पक्ष पर शिववास और करण योग*
वैदिक पंचांग के अनुसार पितृ पक्ष के पहले दिन रात 9.11 बजे  तक शिववास योग का संयोग है। इस दौरान देवों के देव महादेव कैलाश पर जगत की देवी मां गौरी के साथ विराजमान रहेंगे। शिववास योग के दौरान पितरों का तर्पण करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होगी। साथ ही व्यक्ति पर पितरों की कृपा बरसेगी।

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