-फाइनल राउंड में सभी प्रतिभागियों को मिला सर्टिफिकेट व मोमेंटो
– गाइड शिक्षकों को भी किया गया मेडल देकर सम्मानित
रायपुर, संवाद साधना। चेन्नई में स्पेस तिरुविझा कार्यक्रम 29 अगस्त को अन्ना सेंटनरी ऑडिटोरियम में किया गया। इसमें छत्तीसगढ़ राज्य से 11 चयनित यंग साइंटिस्ट विद्यार्थी एवं 8 गाइड शिक्षक शामिल हुए। यह अवसर विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायी रहा, जहां उनके उत्कृष्ट नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर मंच प्रदान किया गया। फाइनल राउंड में सभी प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट एवं मोमेंटो, वहीं गाइड शिक्षकों को मेडल प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों के लिए विशेष रूप से तारामंडल खोला गया, जिससे उन्हें अंतरिक्ष जगत को नजदीक से समझने का अवसर मिला। इसके साथ ही इसरो की ओर से प्रदर्शनी बस लगाई गई थी, जिसमें विद्यार्थियों ने इसरो द्वारा विकसित उपग्रहों एवं उनके कार्यप्रणाली का अवलोकन किया। इस कार्यक्रम के अवसर पर स्पेश किड्स इंडिया के सीईओ डॉ. श्रीमथी केसन ने कहा कि हमारा लक्ष्य युवाओं में वैज्ञानिक सोच और नवाचार की संस्कृति को विकसित करना है। यह बच्चे ही आने वाले समय में भारत को वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में स्थापित करेंगे। न्यूरिजन स्पेस विंग कमांडर (से.नि.) जय तारे, सीईओ ने कहा कि अगर आपके अंदर जुनून है और मेहनत करने का साहस है, तो कोई ऊंचाई ऐसी नहीं जिसे आप छू न सकें। आसमान भी सीमा नहीं है, बल्कि उससे आगे भी दुनिया है। इन विद्यार्थियों के मार्गदर्शन में भोलाराम निर्मलकर, यशवेंद्र ताम्रकार, पंकज सोनी, विनीता सुधीर, आर.पी. निषाद, ललित कुमार जंघेल और योगेश्वरी लहरी शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम के राज्य समन्वयक चंद्रशेखर मिथलेश ने छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया।
विद्यार्थियों ने किए अनुभव साज्ञा
मुझे ऐसा लगा कि मैं अंतरिक्ष में चला गया हूं

आशीबाई गोलछा विद्यालय के छात्र दुर्गेश साव ने कहा कि जब मैं तारामंडल गया तो मुझे ऐसा लगा जैसे मैं सचमुच आसमान में पहुंच गया हूं। वहां चारों तरफ अंधेरा था और ऊपर बहुत सारे तारे चमक रहे थे। तारे, ग्रह और चांद इतने पास लग रहे थे जैसे मैं उन्हें छू सकता हूं और जब उल्कापिंड गिरते हुए नजर आ रहा था तो ऐसा लग रहा था की ये सच में हमारे ऊपर ही गिर रहा था। थोड़ी देर के लिए मुझे ऐसा लगा जैसे मैं अंतरिक्ष में ही चला गया हूं। यह अनुभव बहुत ही मजेदार था।
यह अनुभव मेरे लिए बेहद नया और प्रेरणादायक रहा

शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कवर्धा की छात्रा खेलेश्वरी साहू ने बताया कि मुझे आज इसरो के विज्ञान संग्रहालय देखने का मौका मिला, जहां मैंने चंद्रयान-1, चंद्रयान-2 और चंद्रयान-3 के प्रोटोटाइप मॉडल देखे। संग्रहालय में रॉकेट की गति और त्वरण बढ़ाने की प्रक्रिया तथा अंतरिक्ष मिशन की तकनीक से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं। यह अनुभव मेरे लिए बेहद नया और प्रेरणादायक रहा। इस यात्रा ने मुझे विज्ञान के प्रति और अधिक जिज्ञासु बना दिया और देश के लिए कुछ करने का उत्साह भी जगाया।



