– रोबोटिक, आईओटी और फूड प्रोसेसिंग थीम पर प्रदर्शन
दिनेश पाटकर, संवाद साधना। स्पेश इंडिया के कार्यक्रम में रायपुर, महासमुंद सहित राज्य के 7 जिलों के बच्चे चेन्नई में अपने प्रोजेक्ट का प्रदर्शन कर छत्तीसगढ़ राज्य का मान बढ़ा रहे हैं। इस कार्यक्रम में 11 छात्र-छात्राएं, 8 गाइड शिक्षक और राज्य समन्वयक चंद्रशेखर मिथलेश चेन्नई में आयोजित यंग साइंटिस्ट इंडिया (वायरएसआई) के कार्यक्रम में अपनी भागीदारी निभा रहे हैं। महासमुंद, बलौदाबाजार, रायगढ़, दुर्ग, रायपुर, बालोद एवं कवर्धा के विद्यार्थी शामिल है। इस कार्यक्रम में देशभर से करीब 158 स्कूल के बच्चे अपने-अपने प्रेजेंटेशन को लेकर राष्ट्रीय स्पर्धा में हिस्सा लिए हैं। कार्यक्रम चेन्नई में मदर टेरेसा हॉल में यंग साइंटिस्ट इंडिया(वायएसआई) द्वारा आयोजित किया जा रहा है।
ये छात्र-छात्राएं विभिन्न थीम के आधार पर करेंगे प्रदर्शन
आशी बाई गोलछा विद्यालय महासमुंद से डिगेश सेन, दुर्गेश साहू, हिमांशी टंडन, गांजर महासमुंद से यामिनी साहू, बेलसोंडा से मेघना चंद्राकर, मरदा से झरना साहू, सेजस बालोद से डॉली साहू, जमगांव आर अमीषा निषाद, रायगढ़ से नामिका निषाद, सेजस गुढिय़ारी दर्जील कुर्रे कवर्धा से खेलेश्वरी साहू अपने प्रोजेक्ट का प्रदर्शन विभिन्न थीम के आधार पर करेंगे। विद्यार्थियों के मार्गदर्शक शिक्षक भोलाराम निर्मलकर, यशवेंद्र ताम्रकार, पंकज सोनी, विनीता सुधीर, आरपी निषाद, ललित कुमार जंघेल, योगेश्वरी लहरी कार्यक्रम मे बच्चों के साथ उपस्थित है।

लाई-फाई
आज की दुनिया में इंटरनेट और डेटा ट्रांसफर की मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है। वर्तमान समय में वाई-फाई का उपयोग अधिक होता है, लेकिन इसमें स्पीड, सुरक्षा और बैंडविड्थ से जुड़ी कुछ सीमाएं होती हैं। इन समस्याओं को दूर करने के लिए लाई-फाई (लाइट-फिडिलिटी) तकनीक विकसित की गई है। यह तकनीक रेडियो वेव्स की जगह प्रकाश (वाइसेबल लाइट कम्यूनिकेशन) का उपयोग करती है। इस प्रोजेक्ट में हमने एलईडी लाइट के माध्यम से डेटा, ऑडियो और टेक्स्ट ट्रांसफर करके दिखाया है। भविष्य की संभावनाएं – घर, ऑफिस, हॉस्पिटल, मेट्रो, एयरपोर्ट आदि में हाई स्पीड इंटरनेट।
पनडुब्बी और हवाई जहाजों में संचार।
डॉली साहू, सेजेस बालोद
आईटीओ आधारित होम ऑटोमेशन सिस्टम

आज के युग में ऑटोमेशन हमारी जिंंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। घर, ऑफिस एवं इंफ्रास्ट्रक्चर को स्मार्ट बनाने के लिए आईओटी(इंटरनेट ऑफ थीम) आधारित होम ऑटोमेशन सिस्टम एक बेहतरीन समाधान है। इस सिस्टम के माध्यम से उपयोगकर्ता इंटरनेट द्वारा पंखा, लाइट, कूलर, फ्रिज, ए.सी., सीसीटीवी आदि डिवाइस को नियंत्रित कर सकता है। इस प्रोजेक्ट में मैनुअल स्विचिंग का विकल्प भी रखा गया है ताकि इंटरनेट या सिस्टम फेलियर की स्थिति में उपकरणों को मैन्युअली ऑपरेट किया जा सके। इसमें केट-6 केबल का उपयोग किया गया है, जिसमें डेटा और पावर दोनों सप्लाई एक साथ होती है। यह प्रोजेक्ट वर्तमान ऑटोमेशन जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
छात्र- दुर्गेश साह, आशी बाई गोलछा विद्यालय महासमुंद
प्रोजेक्ट- दवा याद दिलाने वाली घड़ी

यह घड़ी एंड्रराइड नानो और आरसीटी मॉड्यूल से समय तय करती है। ओलेड स्क्रीन और बजर के जरिए दिन में तीन बार दवा लेने का स्मरण कराती है। इसकी उपयोगिता बुजुर्गों, मरीजों और व्यस्त लोगों के लिए यह किफायती व भरोसेमंद साथी है, जो सेहत का ध्यान रखता है।
कुलेश्वरी साहू, कवर्धा
आंगनबाड़ी बच्चों का हेल्थ एवं डेली अटेंडेंस मॉनिटरिंग सिस्टम

आंगनबाड़ी में आने वाले छोटे बच्चों के स्वास्थ्य की निगरानी एवं उपस्थिति का सही रिकॉर्ड बनाए रखना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। इस प्रोजेक्ट में टीओटी एवं सेंसर तकनीक का उपयोग कर एक स्मार्ट सिस्टम विकसित किया गया है। प्रत्येक बच्चे को आरएफआईडी कार्ड प्रदान किया गया है, जिसके माध्यम से उनकी डेली अटेंडेंस दर्ज होती है।साथ ही, लोड सेंसर एवं आईआर सेंसर से बच्चों का वजन व लंबाई मापी जाती है और बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) के आधार पर कुपोषण की स्थिति का पता लगाया जाता है। टेंप्रेचर सेंसर बच्चों का रोजाना शरीर का तापमान रिकॉर्ड करता है जिससे किसी बीमारी की संभावना समय पर पहचानी जा सके।यह सिस्टम मोबाइल/क्लाउड डाटाबेस पर डाटा स्टोर करता है जिससे डॉक्टर एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ता बच्चों की प्रगति पर लगातार निगरानी रख सकते हैं। इसका लाभ बच्चों की डेली अटेंडेंस ऑटोमेटिक रिकॉर्ड होती है। वजन, लंबाई, तापमान जैसे हेल्थ पैरामीटर रोज़ाना रिकॉर्ड होते हैं। बीएमआई कैलकुलेशन से कुपोषण की स्थिति का पता समय पर चल जाता है।
डिगेश सेन, आशी बाई गोलछा महासमुंद
ग्रीनस्पेस, टिकाऊ भविष्य के लिए अपशिष्ट प्रबंधन और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का एकीकरण

नियंत्रण केंद्र, कृत्रिम प्रकाश संश्लेषण, ओजोन परत संरक्षण, अंतरिक्ष से अंतरिक्ष यानो के अपशिष्ट मलबे को हटाना, स्वचालित अपशिष्ट पृथक्करण और पुनर्चक्रण, ये सभी घटक अंतरिक्ष में भोजन, ऑक्सीजन और ईंधन तैयार करने, अपशिष्ट संग्रह और पुनर्चक्रण के लिए एक साथ काम करते हैं। इसका उद्देश्य एक व्यापक मॉडल का डिजाइन और विकास करना जो अपशिष्ट प्रबंधन और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को संयोजित कर एक सतत विकसित भविष्य का निर्माण करना, तथा पुनर्चक्रण, संसाधन संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दे।
1) सतत अपशिष्ट प्रबंधन
2) नवीन अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी
3) पर्यावरण संरक्षण
4) संसाधनों का संरक्षण
5) ओजोन परत संरक्षण
मार्गदर्शक शिक्षिका – योगेश्वरी लहरी
प्रधानाचार्य का नाम-श्रीमती जॉली साहू
स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय तिलक नगर गुढय़िारी रायपुर छत्तीसगढ़।



