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43 वर्षों से नौकरी देने के लिए एनटीपीसी कोरबा प्रबंधन द्वारा किया जा रहा  गुमराह

0 भू विस्थापित ग्राम चारपारा की प्रेस वार्ता 

कोरबा ,एनटीपीसी कोरबा मूविस्थापित ग्राम चारपारा के 08 भू-विस्थापित लक्ष्मण लाल कैवर्त, प्रहलाद केवट, पीकराम केवट, अर्जुन देवांगन राजकुमार केवट, सुनील कुमार केवट, उगेंद पटेल अनुप केवट एनटीपीसी कोरबा में नौकरी के लिए दिनांक 04/07/2022 को आवेदन पत्र दिया गया था जिसमे समय अवधि में नौकरी नही दिये जाने पर आमसूचना अनुसार नौकरी मांग को लेकर दिनांक 16/06/2022 से तानसेन चौक, नगर पालिक निगम के पास कोरबा में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर 32 दिन से बैठे हुए है। आज से 43 साल पूर्व एनटीपीसी कोरबा के द्वारा सन् 1978 1979 में 2000 मेगावाट के लिए ग्राम चारपारा की कृषि और आवासीय (संपूर्ण जमीन) का अधिग्रहण किया गया था जिसमें

बाजार मूल्य से कम सस्ते दरो पर मुआवजा दी गई। मुआवजा ज्यादातर लगभग2500 -3000 रूपये के आसपास प्रति एकड़ की दर से दी गई थी।अधिग्रहण के पश्चात जिन ग्रामवासियो की जमीन अधिग्रहित की गई थी उन्हें एनटीपीसी कोरबा में रोजगार देने के लिए दिनांक 04/09/1979 को एनटीपीसी कोरबा के तत्कालीन महाप्रबंधक श्री के.सी. जैन द्वारा आम सूचना जारी कर कहा गया था कि आप लोगो ने इस विशाल परियोजना हेतु अपनी खेती योग्य एवं आवासीय भूमि प्रदान की है इसके लिए राष्ट्रीय विद्युत ताप परियोजना की ओर से मैं हार्दिक बधाई देता हूँ। राष्ट्रीय विद्युत ताप परियोजना निगम ने सिद्धांतः यह स्वीकार किया है कि प्रत्येक परिवार में एक व्यक्ति को जिनकी भूमि परियोजना हेतु अधिग्रहित की गई है क्रमिक रूप से शैक्षणिक एंव अन्य योग्यताओं के आधार पर रोजगार प्रदान किया जायेगा।परियोजना का निर्माण कार्य जैसे जैसे बढ़ता जावेगा, रोजगार के अवसर भी बढ़ते जायेंगे एवं तदनुसार आप लोगो को भी क्रमिक रूप से रोजगार प्रदान किया जावेगा एक साथ सभी के लिए रोजगार मुहैया करना असंभव है और न ही किसी परियोजना में ऐसा हुआ है।

उसके बाद नौकरी लेने की प्रक्रिया की शुरूवात की गई जिसमें ग्राम चारपारा से एक दो परिवार को नौकरी देने के पश्चात ग्राम चारपारा के लोगों को नौकरी नहीं देने पर काम को रोका गया और दिनांक 13/01/1981 में विभिन्न समस्याओं के लिए कोरबा में बैठक की गई जिसमें चारपारा की समस्या के ऊपर चर्चा की गई बैठक में तत्कालिन महाप्रबंधक श्री के.सी. जैन एनटीपीसी कोरबा और ग्राम चारपारा के प्रतिनिधी श्री देवांगन के चर्चा करने के पश्चात यह निर्णय लिया गया कि ग्रामीण लोग निर्माण कार्य में बाधा उत्पन्न नहीं करेंगें एनटीपीसी प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को अविलंब ही नौकरी देंगें। जिस व्यक्ति को नौकरी से निकाले है उन्हे वापस लेने की सहमति बनी। पुनः दिनांक 17/08/1981 को एनटीपीसी कोरबा द्वारा रोजगार के लिए दूसरा आम सूचना जारी की गई फिर से नौकरी लेने की प्रक्रिया को शुरू की गई और तीसरा आम सूचना दिनांक 12/02/1987 को एनटीपीसी कोरबा में रोजगार व दुकान देने के लिए जारी किया गया परन्तु इन सूचना से नौकरी नही दिये जाने के कारण सन् 1988 में जो ग्रामवासी ग्राम चारपारा से नही हटे थे

 उनके बीच 14 व्यक्तियों को नौकरी देने की सहमति बनी और अब तक ग्राम चारपारा के 307 परिवार में से मात्र 38 परिवार को नौकरी दी गई है इसमें से गये 209 परिवार द्वारा कई बार नौकरी की मांग की आफिसों के चक्कर काटे गये जब जब नौकरी की मांग किये जाने पर भूविस्थापितों को एनटीपीसी कोरबा प्रबंधन द्वारा गुमराह किया जाता रहा है रिक्तियां नहीं कहा जाता है इस तरह अपने वादों से मुकरते रहे हैं अन्य योजनाएं देने की बात करते हैं। सन् 1987 के बाद नौकरी न देना पड़े इसलिए आमसूचना जारी करना बंद कर दिया गया। सन् 1979 में एनटीपीसी कोरबा विद्युत पावर प्लान्ट निर्माण शुरूवात की गई सन् 1983 से पहला युनिट 200 मेगावाट की शुरूवात की गई और प्रोडक्शन के समय लगभग 3500 परमानेंट कर्मचारी कार्य कर रहे थे और परियोजना का विस्तार आज 2600 मेगावट तक पहुँच गई है जबकि आज लगभग 650 परमानेंट कर्मचारी कार्यरत है जबकि पावर प्लान्ट का कार्य लगभग 2500 लोगो को ठेका के माध्यम कार्य कराया जा रहा है। एनटीपीसी कोरबा प्रबंधन द्वारा कहा गया था कि परियोजना का निर्माण कार्य जैसे जैसे बढ़ता जावेगा, रोजगार के अवसर भी बढ़ते जावेगे एवं तदनुसार आप लोगो को भी क्रमिक रूप से रोजगार प्रदान किया जावेगा परन्तु अपने लिखित वादों से नौकरी देने में मुकर रहे है। इसी संबंध में नौकरी नही दिये जाने के कारण 16/08/2022 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे हुए है। हड़ताल के दौरान एनटीपीसी प्रबंधन, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कटघोरा, जिला प्रशासन व 08 भू-विस्थापितों के प्रतिनिधियों के साथ 03 बार बैठक हुई है लेकिन एनटीपीसी कोरबा प्रबंधन नौकरी देने के लिए तैयार नही है।

43 वर्ष से नौकरी देने के नाम से एनटीपीसी कोरबा प्रबंधन द्वारा गुमराह किया जा रहा है हमारे साथ अन्याय और अत्याचार हो रहा है इसलिए जब तक एन.टी.पी.सी. कोरबा द्वारा नोकरी नही दी जाती तब तक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे रहेगे।

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