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याद बाकी……बात बाकी

पुलिस का वह शमा, जो वक्त से पहले गुल हो गया

लेखक – जसवंत पवार (महासमुंद)

भिंडी बाजार मुंबई के मॉल के अंदर सेलून में एक युवक अपनी कटिंग करा रहा था, आंखें बंद थी, युवक निश्चिंत और बेफ्रिक था, तभी उसके कनपट्टी पर कोई कड़ी और ठंडी चीज आकर टिकी, कटिंग करा रहे युवक को आभास हुआ, कनपटी पर टिकी ठंडी और कड़ी चीज नाई का कोई औजार नहीं हो सकता। उसने आंखे खोली सामने आईने पर अपने प्रतिबिम्ब को निहारा उसके कनपट्टी पर जो उसने दबाव महसूस किया था वह कड़ी चीज थी पिस्टल। एक युवक उसके कनपट्टी पर पिस्टल अड़ाए खड़ा था। पिस्टल वाले युवक ने कटिंग करा रहे युवक को आंखे खोलकर अपने प्रतिबिम्ब को निहारते देखा तो, पिस्टल वाले युवक ने कहा…छत्तीसगढ़ पुलिस। छत्तीसगढ़ पुलिस का नाम सुनते ही कुर्सी पर बैठा युवक हाथ झटक कर सेलून से सरपट भागा भिंडी बाजार की भीड़ भरी सड़क पर…।भिंडी बाजार मुंबई के इलेक्ट्रॉनिक सामानों के लिए जाना जाता है तो वहीं चोर बाजार और गुंडागर्दी के लिए बदनाम है। ऐसे बदनाम जगह पर छत्तीसगढ़ का एक पुलिस वाला हाथ में पिस्टल लिए सामने एक संदेही आरोपी को खड़बड़-खड़बड़ दौड़ाए जा रहा था। अनजान और अपरिचित जगह पर बगैर वर्दी के, आगे जाकर उस संदेही को छत्तीसगढ़िया पुलिस वाला, गर्दन से दबोज ही लेता है। भीड़ जुट जाती है पर छत्तीसगढ़ का वह जवान कोई खौफ नहीं खाता..बेखौफ होकर कहता है-महासमुंद, छत्तीसगढ़ पुलिस। पुलिस वाले ने आरोपी के कनपट्टी पर पिस्टल टीकाकर दहाड़ा…ज्यादा होशियारी नई… सीधा ठोंक दूंगा। आरोपी की सिट्टी-पिट्टी गुम…पुलिस जवान के सहयोगी भी तब तक वहां पहुंच गए थे, आरोपी को गिरेबान से पकड़कर पुलिस गाड़ी में डाला गया।  अब यहां पर बतलादें कि जो युवक सेलून में बाल कटवा रहा था वह मुंबई भिंडीबाजार का ही निवासी था जिसके ऊपर बिरकोनी फर्नेश आयल के संबंध में आरोप था और वह फरार चल रहा था..वहीं उसके पीछे फिल्मी पर्दे में नायक की तरह दौड़ने वाला पुलिस जवान महासमुंद का तेज तर्रार एएसआई विकास शर्मा थे।

ऐसे ही एक घटना दिल्ली की है जहां पर अपने आलीशान हॉटल में एक चिटफंड का मालिक छिपा बैठा था। उसने छत्तीसगढ़ के लोगों को करोड़ों का चूना लगाया था। रायपुर पुलिस जिसे पकड़ने में नाकाम और अफसल थी। ऐसी स्थिति में दुर्ग रेंज के आईजी ने महासमुंद क्राइम स्क्वॉड को इस मामले को सौंपा। विकास शर्मा इस टीम का नेतृत्व कर रहे थे। विकास की इस टीम में तीन पुलिस वाले और शामिल थे। पुलिस सूत्र बतलाते है कि यहां पर विकास शर्मा ने बड़ी ही सूझ-बूझ से आरोपी को उसके हॉटल के ऊपरी मंजिल पर ही निहत्थे घुसकर पकड़ लिया था। आरोपी के बॉडीगार्ड हथियारों से लैस थे। आरोपी ने अपने आपकों बचाने के लिए साम-दाम-दण्ड-भेद सारे तरीके अपनाए, पर विकास के सामने सब बेकार थे। सूत्र बतलाते हैं कि उन्हें मोटी राशि का प्रलोभन भी दिया गया और आरोपी ने अन्यथा की स्थिति में मामला वहीं पर देख लेने और रफा-दफा कर देने की धमकी भी दी। इस बीच पूर्व निर्धारित प्लान के अनुसार उनकी अपनी पुलिस टीम भी पहुंच गुई और पुलिस प्रक्रिया पूर्ण कर आरोपी को पकड़कर रायपुर लेकर आ गई। विकास के इस  अदम्य साहस पर पुलिस प्रशासन ने आऊट आफ टर्न प्रमोशन देकर प्रधान आरक्षक से सहायक उपनिरीक्षक बनाया ।

15 जुलाई 1980 को विकास शर्मा  का जन्म हुआ था पिता का नाम पवन शर्मा था और माता का नाम श्रीमती सरला शर्मा है जो कि जिला कोषालय से सेवानिवृत्व कर्मचारी है। विकास चार भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। विकास ने बीएससी की थी। इनकी पुलिस विभाग में आरक्षक के पद पर प्रथम नियुक्ति 2005 में हुई थी। पुलिस प्रशिक्षण में प्रथम आने पर ही इनकी आॅऊट आफ टर्न प्रधान आरक्षक हो गए थे। 41 वर्षीय विकास अविवाहित पर पुलिस के लिए समर्पित थे। इन्होंने बुंदेली पुलिस चौकी के प्रभार में रहते हुए, सामाजिक पुलिस का कार्य किया। बुंदेली को शराब और जुआ जैसी सामाजिक बुराई से मुक्त कराया जो कि सामाजिक जनचेतना का मिसाल था। विकास शर्मा पर्यावरण प्रेमी भी थे। विकास को सर्प पकड़ने में महारत हासिल थी। बगैर स्टिक के वह सांपों को निर्भय होकर पकड़ लेता था चाहे सर्प कितना ही जहरीला या खतरनाक क्यों न हो। अनगिनत सर्पो को विकास ने घर-आंगन से पकड़कर जंगलों में जीवनदान दिया है। विकास शर्मा शहर क्या जिले के लिए अपरचित नहीं थे। शहर के अधिकांश नागरिकों के पास विकास का मोबाइल नंबर था सहयोगी, सामाजिक, नागरिक के रूप में। साहित्य के प्रति गहरी रूचि थी अच्छे  कवि और लेखक थे। विकास की कई रचनाएं समाचार पत्रों में प्रकाशित भी हुई है। सर्प और अपराध पर इनकी गहरी स्टडी और होमवर्क था। बाक्सिंग के अच्छे खिलाड़ी और एक अच्छे धावक थे। समरशॉट और कातवेल इनका फीट था। मोटर ड्रायव्हिंग गजब की थी। विकास शर्मा के अधिकारी रहे एक पुलिस वाला बतलाते है कि विकास एक काबिल पर खतरनाक ड्रायव्हर था विकास शर्मा की ड्रायविंग गांजा तस्कारों के खिलाफ खूब सफल रहा है। गांजा तस्करों की गाड़ी कभी भी विकास शर्मा के राडार से बाहर नहीं जा सका। विकास शर्मा के साथ कई मिशनों में शामिल रहे उनके एक मित्र ने नम आंखों से भराई आवाज में एक घटना का जिक्र करते हुए बतलाया कि बागबाहरा थाना क्षेत्र में लगातार चोरी और डकैती की घटना घट रही थी। डकैती से जन अक्रोश फैल रहा था पुलिस परेशान थी। पुलिस अधीक्षक ने मामला क्राइम स्क्वाड को दिया। क्राइम स्क्वाड को दिया। क्राइम स्क्वाड पत्तासाजी कर ग्वालियर बाजार में चार आरोपियों को पकड़ने में सफलता हासिल कर ली। पांचवां आरोपी पकड़ से बाहर हो ग्वालियर की भीड़ भरी सड़क पर खड़बड़-खड़बड़ लोगों को धकियाते गिराते भाग रहा था और उसके पीछे लगा था विकास शर्मा कुछ दूरी पर विकास ने आरोपी डकैत की गर्दन को अपनी कांख में दबा घसिटते पुलिस गाड़ी तक ले आया यह महासमुंद पुलिस की बड़ी सफलता थी।

इसी तरह सरायपाली में एक हथियार बंद आरोपी को पकड़ने के लिए विकास शर्मा ने एक चलती ट्रेलर के नीचे से घुसकर दूसरी तरफ निकलकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। नक्सली धमकी पर फिरौती की रकम वसूलनेआए एक आरोपी को विकास ने खलिहान में रखे पैरावट के अंदर में तीन-चार घंटे तक छिपकर पकड़ लिया था..विकास शर्मा की साहस…रोमांच और कर्त्व्यपरायणता  के पुलिस विभाग में सेवा के इन 17 बरसों में कई सत्य घटनाओं पर आधारित किस्से हैं। और न जाने कितने किस्से आगे जुड़ते यदि 19 मार्च 2022 की रात में उसकी हत्या न हुई होती । 19 मार्च की रात में विकास की हत्या की घटना महासमुंद व पुलिस प्रशासन के लिए एक अपूर्णिय क्षति है। जब तू आया जगत में, जगत हंसे तू रोये। ऐसी करनी कर चले, आप हंसे जग रोय।।

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