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सड़क चौड़ीकरण का हाल, 6 माह में केवल नाली बनाई, वह भी आधी-अधूरी

 पिछले आठ दिनों से काम बंद, सड़क पर उड़ रही धूल से राहगीर और  व्यवसायी त्रस्त

महासमुंद। बरोंडा चौक से कलेक्टोरेट कालोनी तक सड़क चौड़ीकरण का कार्य सितंबर में शुरू हुआ। इन 6 माह में केवल नाली निर्माण का कार्य, पोल शिफ्टिंग का कार्य ही हो पाया है, वह भी आधा-अधूरा। इधर काम होली के पहले से ही बंद है, पर सड़क चौड़ीकरण कार्य चालू नहीं हुआ है। इससे कार्य पूर्ण करने की समय-सीमा तो कम हो ही रही है। सड़क पर उड़ रही धूल और अव्यवस्था से राहगीर परेशान हो रहे हैं।बता दें कि महासमुंद नगरपालिका क्षेत्र में बरोण्डा चौक से कलेक्टर कॉलोनी तक लगभग 2.3 किलोमीटर लंबी सड़क के चौड़ीकरण के लिए 10 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। कार्य एजेंसी के रूप में लोक निर्माण विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसने मेसर्स किरण बिल्डकॉन को ठेका दिया है। इस परियोजना के तहत सड़क की दोनों ओर नाली निर्माण और बीच में डिवाइडर बनाया जाना है। लेकिन 6 माह में केवल नाली निर्माण का काम हो पाया है, वह भी आधा-अधूरा। लोक निर्माण विभाग व ठेकेदार की मनमानी व लापरवाही ने इस मार्ग से आने-जाने वालों को त्रस्त कर रखा है। बढ़ती गर्मी में सड़क पर धूल, बदहाल हो चुकी सड़क पर चलना दूभर हो गया है। जबकि यह मार्ग कलेक्टोरेट, पुलिस अधीक्षक कार्यालय, कलेक्टोरेट कॉलोनी, हाउसिंग बोर्ड, अटल विहार कॉलोनी समेत कई और कॉलोनियों, सरकारी कॉलेजों और दर्जनों दफ्तरों, विधायक कार्यालय, भाजपा कार्यालय, उद्यान तथा चौपाटी , खेल परिसर तक लोगों को पहुँचाता है। लेकिन इस बात को लेकर हैरानी होती है कि सबसे ज्यादा व्यस्त सड़क की इस दुर्दशा की सुध अधिकारी, जनप्रतिनिधि आखिर क्यों नहीं ले रहे हैं?

*हर रोज हो रही छुटपुट घटनाएं*

सड़क पर जगह-जगह गढ्ढे हो गये हैं जो दुर्घटना की आंशका को बल दे रहे हैं। निर्माण कार्य के दौरान बड़ी-बड़ी गिट्टीयां इधर-उधर फैली हुई है। नियमित रूप से पानी का छिड़काव न होने से उड़ती धूल से राहगीर परेशान व विभाग और ठेकेदार की कार्यप्रणाली से आक्रोशित हैं। राहगीर सहित व्यापारियों का कहना है कि निर्माण के दौरान भी बीच-बीच में गड्ढों में पेच वर्क और नियमित पानी का छिड़काव कर जनता को राहत क्यों नहीं दिलाई जा रही। हमेशा ही गड्ढों में गिरने, दुर्घटनाओं का शिकार होने की आंशका बनी रहती है।*लगातार बरती जा रही लापरवाही*

सड़क निर्माण में लेटलतीफी और ठेकेदार द्वारा लापरवाही की लगातार शिकायतें सामने आ रही है। धूल के गुबार से बचाव के लिए नियमित पानी का छिड़काव और सड़क की दोनों ओर सफेद बोरे में भरी रेत रखी जाए ताकि रात में वाहन चालकों को खतरे का संकेत मिल सके। लेकिन इन नियमों का पालन नहीं हो रहा है। बिना सुरक्षा इंतजाम के खुदे गड्ढे किसी भी बड़े हादसे को आमंत्रण दे रहे हैं।

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