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बाइपास के लिए नए सिरे से डीपीआर की तैयारी

एक दशक से बाइपास निर्माण की हो रही मांग

शहर से होकर गुजरे राष्ट्रीय राजमार्ग 353 पर यातायात कम करने  प्रस्तावित बाइपास निर्माण के लिए नए सिरे से डीपीआर तैयार करने की तैयारी की जा रही है। विभाग ने इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूर्ण कर ली है। बाइपास निर्माण के लिए भोपाल की कंपनी डीपीआर बनाएगी। डीपीआर तैयार होने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
बता दें कि जिला मुख्यालय राष्ट्रीय राजमार्ग 353 के दोनों ओर बसा है। राजमार्ग पर रायपुर से ओड़िशा की ओर आने-जाने वाले मध्यम वाहनों के साथ भारी वाहनों का दबाब रहता है। मार्ग पर यातायात के बढ़ते दबाव को देखते हुए 2014-15 से ही जिला मुख्यालय में नागरिकों द्वारा बाइपास निर्माण की मांग की जा रही है। 2015 में 18 किमी  बाइपास बनाने के लिए सर्वे भी हुआ और डीपीआर भी बनाया गया था। इसमें 13 गांव के खसरों को शामिल किया गया था। वर्ष 2023 में डीपीआर को निरस्त कर नए सिरे से डीपीआर बनाने की बात सामने आई। गत वर्ष देवउठनी (तुलसी पूजा) के दिन  कांग्रस चौक पर एक दंपत्ति की ट्रक से कुचलने से हुई मौत के बाद शहरवासियों ने अभियान भी चलाया और बाइपास बनाने की मांग फिर जोर पकड़ने लगी।
पूर्व विधायक विनोद चंद्राकर ने केंद्रीय मंत्री को बाइपास निर्माण के लिए पत्र भी लिखा। इसके अलावा नपाध्यक्ष राशि महिलांग ने भी केंद्रीय मंत्री से मुलाकात कर बाइपास निर्माण की मांग रखी। बाइपास निर्माण संघर्ष समिति द्वारा भी समय-समय पर मांग की जाती रही है। अब नए सिरे से डीपीआर तैयार करने के लिये  टेंडर हो पाया है। टेंडर भोपाल की कंपनी लायंस इंजीनियरिंग को मिला है। डीपीआर रिपोर्ट जमा करने के बाद ही बाइपास निर्माण के कार्य में गति आएगी। बहरहाल, डीपीआर के टेंडर होने से उम्मीदें बढ़ गई हैं। एनएच के स्थानीय अधिकारी ने बताया कि टेंडर हो गया है। भोपाल की कंपनी को टेंडर दिया गया है। डीपीआर बनाने में समय लगेगा। डीपीआर की स्वीकृति भी लेनी होती है।
लगातार बढ़ रहा दबाव, बाइपास की नितांत आवश्यकता
मालूम हो कि शहर से गुजरि राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात का दबाव लगातार बढ रहा है। शहर की आबादी बढ़ने के साथ-साथ वाहनों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है।त्योहारी सीजन में ट्रैफिक का दबाव बढ़ जाता है। ओडिशा की ओर से आने वाले ज्यादातर वाहन शहर से होकर गुजरते हैं। इसके अलावा टोल से बचने के लिए भी कई वाहन अपना रूट बदलते हैं। जिससे शहर का ट्रैफिक बढ़ जाता है। बाइपास की मांग 2014 से ही की जा रही है, लेकिन 10 साल बाद भी योजना धरातल पर नहीं उतरी है।  साल-दर-साल कैलेंडर बदल रहे हैं, लेकिन बाइपास की सौगात शहरवासियों को नहीं मिल पा रही है। इसलिए शहर में बाइपास की नितांत आवश्यकता है। बाइपास बन जाने से भारी वाहनों का प्रवेश कम हो जाएगा जिससे दुर्घटनाओं में कमी आएगी।
शहर के भीतर हो चुकी है कई घटनाएं
शहर में भारी वाहनों का बेरोकटोक प्रवेश होता है। लोड ट्रक शहर के मुख्य चौक और चौराहों से गुजरते हैं। कई बार वाहनों की रफ्तार कम नहीं होती है। इससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है। हालांकि शहर में यातायात पर नियंत्रण के लिए सड़क  चौड़ीकरण और डिवाइडर बनने के बाद तीन मुख्य चौक- चौराहों पर ट्रेफिक सिग्नल लगाए गए हैं। बाद भी ओवरलोड और भारी वाहन बेखौफ आवाजाही कर रहे हैं।

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