लगातार बारिश से जंगल, नालों व खेतों से पहुंच रहा पानी
महासमुंद। पिछले पांच दिनों से हो रही लगातार बारिश से बागबाहरा के कैचमेंट एरिया से पर्याप्त पानी आने के कारण कोडार बांध में कुल क्षमता का 70 प्रतिशत जल भराव हो गया है और यह क्रम लगातार जारी है। कोडार बांध में अभी तक 21.40 फीट पानी भर गया है।
बता दें कि 30.50 फीट कुल क्षमता वाले कोडार बांध में बागबाहरा के नवापारा, खल्लारी, पटेवा, गबौद, सरायपाली, खैरवार, ठुमसा सहित 14 गांव कोडार बांध के कैचमेंट एरिया में आते हैं। जब बारिश होती है तो इन गांवों के जंगल, नालों व खेतों से पानी बहकर कोडार बांध तक पहुंचता है जिससे बांध में पर्याप्त पानी एकत्रित होता है। बाद बांध में एकत्रित इस पानी का उपयोग खरीफ फसल धान के लिए एक साल दांए नहर से व दूसरे साल बांए नहर से सिंचाई के लिए किया जाता है। इसके अलावा ग्रीष्मकाल में दांए व बांए नहर से लगभग 50 गांवों के तालाब भरे जाते हैं ताकि इन गांवो में निस्तारी की समस्या न हो। इस साल 1 अप्रैल से 4 मई तक निस्तारी के लिए बांध से पानी छोड़ा गया। बाद कोडार में 5.70 फीट पानी शेष रह गया था। गर्मी में पानी के वाष्पीकरण के बाद 5.30 फीट पानी बचा था। मानसून की शुरूआत में हुई बारिश के बाद बांध का जलस्तर 1 जुलाई को 7.50 फीट हो गया था।
कोडार तीन दिन में 3.7 फीट जल भराव
गर्मी में निस्तारी के लिए पानी देने के बाद 29 जून को कोडार में 5.30 फीट पानी था। जो मानसून की शुरूआत के बाद 1 जुलाई को 7.50 फीट, 10 जुलाई को यह बढ़कर 14.50 फीट हो गया। पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश जारी है। जिससे बागबाहरा के कैचमेंट एरिया से बांध में लगातार पानी एकत्रित हो रहा है। 25 जुलाई को बांध में 17.70 फीट पानी था जो अब 21.40 फीट हो गया है। पिछले पांच दिनों में ही कोडार में 3.7 फीट पानी भरा है।
43 साल में एक बार भी सफाई नहीं
साल 1982 में बने कोडार बांध की लगभग 43 साल में एक बार भी सफाई नहीं हुई है जिससे बाध में सिल्ट जमा हो गया है और बाध की जलभराव क्षमता 15 फीसद कम हो गई है। अगर समय रहते ही बांध में जमे सिल्ट की सफाई नहीं होती है तो धीरे-धीरे सिल्ट बढ़ने से खरीफ फसल धान व निस्तारी के लिए समस्या उत्पन्न हो सकती है। विभाग के अनुसार चार साल पहले सर्वे में बांध में सिल्ट जमा होने की बात सामने आई थी। विभाग के अनुसार सिल्ट की सफाई के लिए जल संसाधन विभाग को केन्द्र सरकार से अनुमति लेना होती है। इसके लिए विभाग ने प्रस्ताव भी भेजा है। अब विभाग को प्रस्ताव पर स्वीकृति का इंतजार है।




