जांजगीर-चांपा। नैला रेलवे फाटक लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। फाटक हमेशा बंद रहने के चलते हर दिन यहां जाम की स्थिति निर्मित हो जाती है। एक बार फाटक बंद होने पर 7 से 8 ट्रेनों के निकालने के बाद ही फाटक खोला जाता है। लोगों को कई बार फाटक खुलने के लिए आधे घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। नैला फाटक में वायशेप ओवरब्रिज का निर्माण होना है। इसके लिए रेलवे और सेतु विभाग के अधिकारी कई बार सर्वे कर चुके हैं मगर इसमें ज्यादातर निजी जमीन और मकान आ रहे हैं। इसके चलते आरओबी निर्माण की प्रक्रिया शुरू नही हो पा रही है। ऐसे में आने वाले कई सालों तक लोगों को इस समस्या से निजात मिलने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है।गौरतलब है कि नैला फाटक से होकर बड़ी संख्या में लोग अपने गंतव्य की ओर रवाना होते है। वही जिला मुख्यालय होने के चलते रोजाना बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का आना जाना जांजगीर लगा रहता है। इस मार्ग से होकर पूरे दिन भर वाहनों की आवाजाही लगी रहती है। नैला रेलवे फाटक में पूरे दिन भर ट्रेनों के गुजरने के चलते अधिकांश समय फाटक बंद होने पर मार्ग के दोनों ओर वाहनों की कतार लग जाती है। कभी कभी तो लगातार ट्रेन गुजरने पर आधे घंटे तक के लिए फाटक बंद होने पर वाहनों की लंबी कतार लग जाता है। लगातार बढ़ रहे यातायात दबाव के मद्देनजर लोगों द्वारा नैला समपार पर लंबे समय से ओवहरब्रिज निर्माण की मांग की जा रही है, ताकि यहां पर लगने वाले जाम से राहगीरों को मुक्ति मिल सके। फाटक बंद होने के चलते इस मार्ग से आवागमन करने वाले वाहन चालकों को गंतव्य स्थान तक पहुंचने में आधा से एक घंटे का अतिरिक्त समय लग जाता है। नैला समपार में ओवर ब्रिज बनने से जांजगीर नैला से बलौदा तथा पंतोरा कोरबा मार्ग पर आवागमन करने वाले वाहन चालकों को समपार पर लगने वालेजाम से छुटकारा मिलेगा और फाटक बंद होने पर उन्हें घंटो खड़े होकर फाटक खुलने का इंतजार भी नही करना पड़ेगा। पूर्ववती भाजपा शासनकाल में यहां ओव्हर ब्रिज बनाने को लेकर सेतु निगम को सर्वे कर रिपोर्ट बनाकर भेजने के लिए कहा गया था। शासन से निर्देश मिलने पर सेतु विभाग ने सर्वे किया और रिपोर्ट तैयार कर स्वीकृति के लिए भेज दिया था। सर्वे में ज्यादातर निजी मकान और जमीन आरओबी के दायरे में आ रहे हैं। जिसके कारण सेतु और रेलवे के अधिकारियों ने चार से पांच बार सर्वे किया मगर समस्या जस की तस बनी हुई है। मुंबई हावड़ा मुख्य रेलमार्ग होने के चलते यहां पूरे दिन ट्रेनों का दबाव बना रहता है। भीषण गर्मी के अलावा बारिश में भी लोगों को फाटक खुलने का इंतजार करना पड़ता है। गर्मी में बढ़ते तापमान से लोगों का हाल बेहाल रहता है। वही दूसरी ओर अधिकांश समय फाटक बंद रहने के चलते राहगीरों को चिलचिलाती धूप में खड़े होकर फाटक खुलने का इंतजार करना पड़ता है। जबकि बारिश के दिनों में भी उन्हें फाटक के पास खड़े होकर खुलने का इंतजार करना पड़ता है। कई बार तो तीन से चार गाड़ियां गुजरने के बाद ही फाटक खुलता है।जिला मुख्यालय जांजगीर में जरुरी काम से रोजाना बलौदा सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की आना जाना लगा रहता है। वहीं दूसरी ओर रोजाना बड़ी संख्या में कोरबा, बिलासपुर जाने वाले राहगीर इसी मार्ग से होकर गंतव्य के लिए गुजरते हैं। जिसके चलते पूरे दिन भर वाहनों का दबाव बना रहता है, मगर दूसरी ओर नैला रेलवे फाटक बंद रहने से फाटक के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारे लगी रहती है। फाटक खुलते ही आगे निकलने की होड में वाहन चालक मनमाने ढंग से वाहन चलाते हैं। जिसके चलते यहां आए दिन जाम की स्थिति बनी रहती है। फाटक बंद होने पर कई बार वाहन चालक घंटे भर तक जाम में फंसे रहते हैं। नैला रेलवे फाटक से आगे कन्हाईबंद में अंडरब्रिज बनाया गया है लेकिन बरसात तो दूर अन्य मौसम में भी यहां पानी भरा रहता है। ऊपर से अंडरब्रिज तक जाने के लिए एक ओर कई किमी तक कोल साइडिंग से होकर गुजरना पड़ता है जिसमें हाइवा वाहनें चलती है और कोयला डस्ट के बीच से होकर गुजरना पड़ता है, जिसके कारण लोग अंडरब्रिज से जाना नहीं चाहते है।





