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महिला बाल विकास में करोड़ो का घोटाला,विधानसभा में बृजमोहन के सवाल पर हुआ भण्डाफोड़

 कोरबा, महिला बाल विकास विभाग कोरबा को जिला खनिज न्यास कोरबा डीएमएफ मद से वर्ष 2020-21, 2021-22 एवं 2022-23 में करोड़ो रूपये की राशि चेक के माध्यम से जारी किया गया था।  प्राप्त राशि का उपयोग जिला कार्यक्रम अधिकारी एवं प्रभारी लिपिक के द्वारा विभिन्न दुकानदारों, संस्थाओं तथा महिला स्व सहायता समूहों को नियम विरुद्ध भुगतान कर दिया गया। विभाग की कार्य प्रणाली में किये अनियमित नियम विरुद्ध खरीदी भुगतान की शिकायत मिलती रही है । 

    श्री बृजमोहन अग्रवाल विधायक भारतीय जनता पार्टी छ.ग. के द्वारा छ.ग. विधानसभा सदन में प्रश्न क्रमांक 599 तथा विधान सभा प्रश्न क्रमांक 650 के माध्यम से जिला खनिज न्यास के संबंध में विभिन्न विषयों पर प्रश्न उठाया गया जिनमें प्रमुख है वर्ष 2019-20, 2020-21 एवं 2022-23 में डीएमएफ मद में कितनी कितनी राशि व्यय की गई एवं जिले में डी.एम.एफ. मद से क्या क्या सामग्री, किस-किस दर पर, किन-किन फर्मों से, कितनी कितनी मात्रा में खरीदी की गई है। क्या खरीदी में छ.ग.भण्डार क्रय नियम का पालन किया गया है अथवा नही । अगर नहीं किया गया तो दोषी कर्मचारियों के विरुद्ध क्या कार्यवाही की गई । डीपीओ मबावि विभाग द्वारा संचालनालय को दी गई गलत जानकारी उल्लेखित प्रश्न में जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास विभाग द्वारा गलत जवाब संचालनालय महिला बाल विकास विभाग रायपुर की ओर प्रेषित किया गया। प्रेषित जबाब का परीक्षण संचालक श्रीमती दिव्या मिश्रा संचालनालय महिला बाल विकास विभाग रायपुर द्वारा किये जाने पश्चात् अपने कार्यालयीन पत्र क्रमांक /15665 / आईसीडीएस – 01 /मबावि / 2022-23 नवा रायपुर दिनांक 24.02.2023 के द्वारा जिला कलेक्टर कोरबा को पत्र जारी करते हुए अनुरोध किया गया हैं कि विधान सभा प्रश्न क्रमांक 599 के प्रश्न (क) के भाग मे वर्ष 2019-20, 2020-21 एवं 2022-23 में कितनी कितनी राशि व्यय की गई है उसकी जानकारी उपलब्ध कराएं। जिसके बाद कोरबा जिले से प्राप्त उत्तर में डीएमएफ मद से प्राप्त राशि के संबंध में विधान सभा प्रश्न क्रमांक 599 एवं 650 में अंतर पाया गया है ।                       5 करोड़ से ज्यादा राशि के घोटाले की आशंका विधान सभा 650 में प्रेषित जानकारी की कुल व्यय राशि  ₹19,93,37,447.00 तथा विधान सभा 599 में प्रेषित जानकारी की कुल व्यय राशि ₹ 50,35,19,759.00 बताया गया है जिसमें दोनों विधानसभा की कुल राशि में ₹ 5,29,62,488.00 का अंतर पाया गया है । लिहाजा संचालक मबावि विभाग रायपुर द्वारा कलेक्टर कोरबा से अनुरोध किया गया है कि जिला स्तर पर परीक्षण की आवश्यक्ता है। मबावि विभाग में घोटाले का ऐसे हुआ भंडाफोड़ विधायक जी के पूछे गये प्रश्न (ख)अनुसार जिले में डी.एम.एफ. मद से क्या-क्या सामग्री, किस-किस दर पर, किन-किन फर्मों से, कितनी कितनी मात्रा में खरीदी की गई है। कोरबा जिले से प्राप्त उत्तर अवलोकन करने पर पाया गया कि डीएमएफ मद से पूरक पोषण आहार हेतु अण्डा, केला व लड्डू इत्यादि का क्रय स्व सहायता समूहो से क्रय किये जाने का उल्लेख है। परंतु छ.ग.भण्डार क्रय नियम में स्व सहायता समूहों से सामग्री क्रय किये जाने के संबंध में राज्य भण्डार क्रय नियम के नियम 8 राज्य शासन के अन्य विभागों एवं उनके उपक्रमों से सामग्रियों का क्रय किया जाना है। जिसके तहत ग्रामोद्योग विभाग से सहायता प्राप्त इकाईयों तथा महिला एवं बाल विकास एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास के अंतर्गत गठित महिला स्व सहायता समूहों द्वारा उत्पादित हैन्डलूम तथा हैन्डीक्राफ्ट सामग्रियों का क्रय शासकीय कार्यालयों द्वार सीधे इन इकाईयों / समूहो से किया जा सकेगा जिसके लिए पृथक से निविंदा बुलाना आवश्यक नही होगा।                 

स्पष्ट है कि पूरक पोषण आहार अन्तर्गत विभिन्न प्रकार की खाद्य सामग्री का क्रय स्व सहायता समूहों से सीधे नही किया जा सकता है। इस संबंध में जिला स्तर पर अपनाई गई प्रक्रिया का परीक्षण करते हुए भंण्डार क्रय नियम का पालन न करने के लिए उत्तरदायित्व का निर्धारण किये जाने की आवश्यकता है। कोरबा जिले द्वारा विभिन्न सामग्रियों को क्रय जेम पोर्टल अथवा खुली निविदा के माध्यम से कय की गई है पर दस्तावेजों का अवलोकन करने पर पाया गया कि क्रय प्रक्रिया में भण्डार क्रय नियमों का पालन नहीं किया गया है। कोरबा जिले से प्रेषित जवाब के अवलोकन से प्रतीत होता है कि जेम पोर्टल व अन्य प्रक्रिया से क्रय की गई सामग्री भण्डार क्रय नियमों का पालन नही किया गया है। यदि भण्डार क्रय नियमों का पालन नही किया गया है तो इसके लिये उत्तरदायी अधिकारियों को चिन्हांकन कर सिविल सेवा आचरण नियमों के अधीन कार्यवाही का प्रस्ताव भेजेंगे ।                   सामग्रियों के क्रय में भण्डार क्रय नियमों का पालन किया जाना परिलक्षित नहीं होता है। उन सभी सामग्रियों के क्रय प्रक्रिया पर जिला स्तर पर सक्षम अधिकारियों से जांच कराया जाकर अभिमत सहित प्रत्येक प्रकरण में पृथक-पृथक टीप प्रेषित किये जाने की अपेक्षा है।         उपरोक्त विषय पर दिव्या उमेश मिश्रा संचालक महिला एवं बाल विकास विभाग छत्तीसगढ़ रायपुर के द्वारा एक सप्ताह के भीतर कार्यवाही कर सुसंगत दस्तावेज विशेष वाहक के हस्ते प्रस्ताव चाहा गया था जोकि अब समाप्त हो गया है ।               करोड़ों के घोटाले को छिपाने की कोशिश हुई तेज प्राप्त जानकारी अनुसार संचालक महिला बाल विकास विभाग रायपुर द्वारा कलेक्टर कोरबा को प्रेषित पत्र में आज दिनांक तक जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग कोरबा द्वारा कलेक्टर कोरबा के संज्ञान में नहीं लाया गया है और ना ही किसी प्रकार की समिति गठित कर जांच एवं कार्यवाही की जा रही है । इससे प्रतीत होता है कि करोड़ों के इस घोटाले में लीपापोती करने के लिए तथाकथित अधिकारियों व कर्मचारियों की टीम पूरी मुस्तैदी से जुट गई है । 

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