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ोरबा, शहर में इन दिनों विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था बहुत ही चिन्ताजनक हो चली हैं। सर्वाधिक अव्यवस्था नगर की नई बस्ती मोहल्ले की हैं। जहा स्थापित किये गए बिजली के खंभे जगह-जगह झुके, लटकते, टिकते, देखे जा सकते हैं। इन खंबों से जोड़े गए तार लगता हैं कभी भी टूट, बिखर कर आने-जाने वालो पर जानलेवा जोखिमपूर्ण बनकर गिर सकते हैं। सर्वाधिक दुर्दशा स्थापित किये गए बिजली ट्रांसफार्मरों की हैं। जो लावारिस होकर टिके हुए तारो के साथ बेबसी में लटके हुए हैं। ढक्कन इत्यादि तो हैं ही नहीं। इनसे हर पल ध्वनिसहित चिंगारीया निकलती रहती हैं। हर खंबे से दर्जनों घरो तक विद्युत आपूर्ति के बेतहाशा तार खींचकर तारो का जाल बिछा दिया गया हैं।
शहर ही नहीं ग्रामीण अंचलो का भी बहुत बुरा हाल हैं। कोरबा जिले से सटे क्षेत्र में तो हाईटेंशन टावर ध्वस्त होकर एक वाहन चालक के ऊपर आन गिरा और उसकी जान चली गयी। विद्युत प्रवाहित तार एक मोटरसायकिल चालक पर गिरकर जानलेवा हो गया। पशुओ के काल-कलवित होने की तो गिनती ही नहीं हैं। मजे की बात यह हैं की प्रदेश के विद्युत वितरण विभाग ने करोडो खर्च कर अव्यवस्था सुधारने का दावा किया था। किन्तु मर्ज बढ़ता ही गया ज्यों-ज्यों दवा की सर्वाधिक दुखद यह हैं की इन अव्यवस्थाओ की शिकायत किससे करे, कैसे करे, और कब करे बिजली बिलो के बनाने का तो और भी बुरा हाल हैं।




