नज्म ए निगम
कोरबा (संवाद साधना। सत्ता बदलने के बाद भी नगर निगम कोरबा की कार्यशाली आज़ तक नही बदली जहाँ बिना चढ़ोतरी के फाइल एक इंच भी नही बढ़ती। सत्ता पक्ष ने निगम को मनी प्लांट बना लिया है वही अधिकारी भी नगदी की चटनी चाट रहे है। कुछ ठेकेदार अपने सेटिंग से ख़ुश है तो कुछ अपने बिल के लिए भटकते नजर आते है। मामला टेंडर का हो या फिर अमानत राशि, डीजल का मामला हो या विद्युत विभाग का सबको अपने अपने हिस्से से मतलब है। शहर के विकास, आमजनों की सुविधा से इन्हे कोई लेना देना नही है बाप बड़ा ना भईया सबसे बड़ा रुपैया के तर्ज पर निगम का घोड़ा दौड़ रहा है।

इधर राख़ड़. धूल. धुआँ के साये मे बसा कोरबा रिश्वतखोरो के चंगुल से बच नही पा रहा, निगम कर्मशाला मे खड़ी अनेको वाहनों मे स्विपनिंग और दो फोग वाहन जो शहर मे प्रदूषण और उड़ती धूल से आम नागरिकों को राहत देने के लिए खरीदी गयी थी जिसकी कीमत लाखों रूपये मानी जाती है आज़ सफ़ेद हाथी के रूप मे खड़ी है। इस वाहन का प्रयोग शायद कोरबा की सड़को मे एकाध बार ही किया गया हो,पर आज़ धूल धुँवा से पटा टी पी नगर बाय पास, सर्वमांगला पुल जो बारिश मे गड्ढों और पानी सुखते ही धूल, कोयले के डस्ट के साथ ऐसे अनेक स्थान आमजन के लिए परेशानी का सबब बन चूका है पर निगम प्रशासन लाखों के इस वाहन का कमीशन खा कर सफ़ेद हाथी की तरह निगम कर्मशाला मे कबाड़ के रूप मे खड़ा कर रखा है।

जबकि इन वाहनों के उपयोग से अनेक प्रकार की बीमारी से कुछ हद तक पाया जा सकता है निगम प्रशासन सत्ता पक्ष की चाटुकारिता मे लगे है और नेता सोशल मिडिया और काजू किसमिस से अभिभूत है।



