
कोरबा। एक ग्रामीण ने पेट दर्द से तबियत खराब होने पर झोलाछाप डॉक्टर से इलाज कराया। एक साथ 4 इंजेक्शन लगने सेउल्टे हालत बिगड़ गई। परिजन को उसे अस्पताल दाखिल कराना पड़ा। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
पसान थाना अंतर्गत ग्राम गुरुद्वारी निवासी किसान भानुप्रताप ओट्टी को करीब 4 सप्ताह पहले पेट में दर्द उठा। इस दौरान उसकी पत्नी सुकुल बाई व बेटा शिवगोपाल रोजगार गारंटी योजना अंतर्गत डबरी में गोदी खोदने गए थे। घर में अकेला होने पर भानुप्रताप ने खुद ही गांव के झोलाछाप डॉक्टर करण कुमार से इलाज कराया। जिसने उसे बांह, कमर व पेट में कुल 4 इंजेक्शन लगाया। जिसके बाद पेट दर्द बढ़ गया। घर लौटने पर भानुप्रताप ने परिजन को उक्त जानकारी दी। उसकी पत्नी सुकुल बाई ने फोन लगाकर करण कुमार को इंजेक्शन लगाने से तबियत उल्टे बिगड़ने की बात कही तो उसने टाइम नहीं होना कहते हुए बात नहीं किया। परिजन भानुप्रताप को इलाज के लिए पेंड्रा अस्पताल ले गए। जहां 2 दिन इलाज के बाद बिलासपुर ले जाने को कहा गया। परिजन उसे सिम्स अस्पताल ले गए जहां भर्ती कर इलाज किया गया। 10 दिनों तक इलाज के बाद भी ठीक नहीं होने पर परिजन उसे घर लेकर पहुंचे। तबियत बिगड़ी तो वे उसे फिर अस्पताल ले गए। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मामले में सुकुल बाई की रिपोर्ट पर पसान पुलिस ने आरोपी करण कुमार के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
स्वास्थ्य विभाग की कार्य प्रणाली पर सवाल, आखिर आंख मूंदकर क्यों बैठे हैं अधिकारी?
बिना पंजीयन प्रमाण पत्र के मरीजों का इलाज करना गैरकानूनी है बावजूद इसके जिले में सैकड़ो की संख्या में झोलाछाप डॉक्टर खुलेआम अवैध रूप से क्लीनिक खोलकर कारोबार कर रहे हैं कई बार ऐसे ही झोलाछाप डॉक्टरों के चक्कर में लोगों की जान जा चुकी है लेकिन स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं जबकि हर अनुविभाग में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी लगातार भ्रमण करते हैं।



