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बेतरतीब ट्रांसपोर्टिंग से धनरास क्षेत्र हुआ राखड़मय

कोरबा। एनटीपीसी और सीएसईबी के धनरास स्थित बांध से अन्यत्र भेजी जाने वाली राखड़ धनरास और आसपास के क्षेत्र के लिए जन स्वास्थ्य का खतरा बनी हुई है। ट्रांसपोर्टिंग का काम बेतरतीब तरीके से करने के कारण यहां-वहां राखड़ का गिरना जारी है। कहा तो यह भी जा रहा है कि अपनी बला टालने के लिए ट्रांसपोटर्स के कर्मी कहीं भी राखड़ गिराने में लगे हैं। इसके चलते ग्रामीण परेशान हैं।
बिजली घरों से हर रोज कई लाख टन निकलने वाली राख के सुरक्षित भंडारण के लिए लोतलोता, गोढ़ी, धनरास और रिस्दा में एश डाइक बनाए गए हैं। इनमें से कुछ वर्ष पहले क्षमता पूरी होने पर एश डाइक की रेजिंग बढ़ाई गई। इसके साथ ही डाइक से राख के निस्तारण का काम भी किया जा रहा है। कोयला खदानों को पाटने के अलावा नेशनल हाईवे के निर्माण के दौरान लो-एरिया को भरने में राखड़ का उपयोग हो रहा है। यह सुविधा ट्रांसपोटर्स को नि:शुल्क दी जा रही है। खबर के मुताबिक धनरास डाइक से बड़ी मात्रा में राखड़ का उठाव इन दिनों कोरबा के ठेकेदार कर रहे हैं। जिनके कर्मी असुरक्षित तरीके से काम को अंजाम देने में लगे हैं। धनरास क्षेत्र पहले से ही राखड़ उडऩे की समस्या से जूझ रहा है। वर्तमान में यहां-वहां राखड़ डम्प करने के कारण तकलीफ कुछ ज्यादा बढ़ गई है। ग्रामीणों की शिकायत इस बात को लेकर भी है कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल और स्थानीय प्रशासन इस बारे में सबकुछ जानने के बाद भी चुप्पी साधे है। ग्रामीणों ने ऐलान किया है कि अगर उनके हितों से खिलवाड़ बंद नहीं हुआ तो वे इस रास्ते पर से राखड़ वाली गाडिय़ों को बिल्कुल नहीं चलने देंगे।

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