Friday, February 6, 2026

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क्या इतिहास बनकर रह जाएगा चांपा का ऐतिहासिक रामबांधा तालाब?


अतिक्रमण, गंदगी और नगर पालिका की उदासीनता से सिमटता जा रहा नगर की शान
चांपा  नगर के हृदय स्थल में स्थित ऐतिहासिक रामबांधा तालाब आज अपने अस्तित्व की अंतिम लड़ाई लड़ रहा है। कभी लगभग 97 एकड़ क्षेत्रफल में फैला यह विशालकाय तालाब छत्तीसगढ़ के चुनिंदा प्रमुख तालाबों में शुमार था, लेकिन आज यह सिमटकर लगभग आधे से भी कम रह गया है।
कभी नगर की आधी से अधिक आबादी की निस्तारी, स्नान, कपड़ा धोने और पीने के पानी की आवश्यकता पूरी करने वाला यह तालाब आज नगर पालिका की उदासीनता और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी का शिकार बनता जा रहा है।
स्वच्छ जल से बदबूदार दलदल तक का सफर
कभी स्वच्छ और निर्मल जल के लिए पहचाने जाने वाले रामबांधा तालाब की वर्तमान स्थिति अत्यंत चिंताजनक है।
तालाब में जलकुंभी, कचरा और सड़ता हुआ अपशिष्ट फैला हुआ है। सफाई के लिए नगर पालिका की कोई ठोस व्यवस्था या भविष्य की योजना नजर नहीं आती, जिसके कारण पानी से बदबू उठने लगी है।
यदि समय रहते सफाई नहीं की गई, तो तालाब में नहाने व निस्तार करने वाले नागरिकों को चर्म रोग, संक्रमण और गंभीर बीमारियों का खतरा उत्पन्न हो सकता है।
अवैध कब्जों से सिकुड़ता तालाब
नगर पालिका की अकर्मण्यता और ढुलमुल रवैये के चलते तालाब के किनारे अवैध रूप से मलबा डालकर पटान किया जा रहा है और बेजा कब्जे कर मकान खड़े किए जा रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि कई प्रभावशाली व्यक्तियों का भी तालाब की भूमि पर कब्जा बताया जा रहा है, जिसके चलते जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग कानूनी कार्रवाई से बचते नजर आ रहे हैं। परिणामस्वरूप अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं और तालाब लगातार सिकुड़ता जा रहा है।
नियम-कानून ताक पर, ‘विकास’ के नाम पर विनाश
तालाबों और पर्यावरण संरक्षण को लेकर शासन द्वारा कई नियम-कानून बनाए गए हैं, वहीं उच्च एवं उच्चतम न्यायालय भी समय-समय पर जलस्रोतों के संरक्षण को लेकर सख्त निर्देश दे चुका है।
इसके बावजूद नगर विकास के नाम पर रामबांधा तालाब को पाटकर नगरपालिका भवन, पीएचई कार्यालय और विवेकानंद गार्डन का निर्माण किया गया। इतना ही नहीं, आज भी तालाब की पटान की गई भूमि पर नए कार्यालय प्रस्तावित और निर्माणाधीन बताए जा रहे हैं।
प्रश्न यह है…
क्या चांपा की पहचान रहा रामबांधा तालाब केवल फाइलों और इतिहास की किताबों में सिमट कर रह जाएगा?
क्या प्रशासन, नगर पालिका और जनप्रतिनिधि जागेंगे या तब जागेंगे जब यह ऐतिहासिक धरोहर पूरी तरह समाप्त हो जाएगी?
अब भी समय है—
अतिक्रमण हटे, तालाब बचे और आने वाली पीढ़ियों के लिए रामबांधा जीवित रहे।

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